पटना, 3 मार्च 2025:
https://www.instagram.com/reel/DGursLvymVq/?igsh=bTZkc2s3eDV0ZDJz
बिहार में लाइब्रेरियन बहाली की मांग को लेकर आज राजधानी पटना में एक विशाल रैली का आयोजन किया गया। यह रैली पटना विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय से शुरू होकर कारगिल चौक, गांधी मैदान होते हुए डाकबंगला चौराहा तक पहुंची। इसमें राज्यभर से आए सैकड़ों प्रशिक्षित लाइब्रेरियन ने हिस्सा लिया। उनकी प्रमुख मांग थी कि राज्य सरकार जल्द से जल्द लाइब्रेरियन के रिक्त पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करे।
**पृष्ठभूमि:**
बिहार में 2008 से लाइब्रेरियन की नियुक्ति नहीं हुई है। इससे राज्य के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में लाइब्रेरियन के हजारों पद रिक्त पड़े हैं। इस स्थिति के कारण लाखों प्रशिक्षित लाइब्रेरियन बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं। ऑल बिहार ट्रेंड लाइब्रेरियन एसोसिएशन के अनुसार, राज्य में लगभग 5 लाख प्रशिक्षित लाइब्रेरियन हैं, जो नियुक्ति की प्रतीक्षा में हैं।
https://www.facebook.com/share/v/15yPRNg16w/
**रैली का आयोजन:**
आज की रैली सुबह 10 बजे पटना विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय से शुरू हुई। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। उनका कहना था कि सरकार शिक्षकों की बहाली कर रही है, लेकिन लाइब्रेरियन की नियुक्ति की ओर ध्यान नहीं दे रही है। रैली कारगिल चौक और गांधी मैदान से गुजरते हुए डाकबंगला चौराहा पहुंची, जहां शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ उनकी वार्ता हुई।
**शिक्षा विभाग के साथ वार्ता:**
डाकबंगला चौराहा पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की। ऑल बिहार ट्रेंड लाइब्रेरियन एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विकास चंद्र सिंह ने अधिकारियों के समक्ष अपनी मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि राज्य में लाइब्रेरियन के रिक्त पदों को भरने के लिए अविलंब भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए। अधिकारियों ने उनकी मांगों को गंभीरता से सुनने का आश्वासन दिया और कहा कि वे इस मुद्दे को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाएंगे।
**प्रशिक्षित लाइब्रेरियन की व्यथा:**
प्रदर्शन में शामिल कई प्रशिक्षित लाइब्रेरियन ने अपनी व्यथा व्यक्त की। उनका कहना था कि उन्होंने लाइब्रेरी साइंस में डिग्री हासिल की है, लेकिन नियुक्ति न होने के कारण वे बेरोजगार हैं। कई लोगों की बहाली की उम्र भी समाप्त हो चुकी है, जिससे वे निराश हैं। उन्होंने सरकार से जल्द से जल्द नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की मांग की।
**पुस्तकालय अधिनियम 2008:**
बिहार में 2008 से पुस्तकालय अधिनियम लागू है, जिसके अनुसार स्कूल-कॉलेज की लाइब्रेरी में लाइब्रेरियन होना अनिवार्य है। लेकिन सच्चाई यह है कि अधिकतर जगहों पर दूसरे कर्मचारी ही लाइब्रेरी का संचालन कर रहे हैं। एसोसिएशन की मांग है कि पूरे राज्य में खाली पड़े 10 हजार पद भरने के साथ ही सरकार नए पदों का सृजन करे ताकि लाइब्रेरियन के 16 सालों का इंतजार खत्म हो और उन्हें रोजगार मिल सके।
**इंडियन लाइब्रेरी एसोसिएशन की पहल:**
इंडियन लाइब्रेरी एसोसिएशन के महासचिव डॉ. उपेंद्र नाथ चौबे ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखकर लाइब्रेरियन की नियुक्ति की मांग की है। उन्होंने पत्र में उल्लेख किया है कि राज्य में लाइब्रेरियन के 7,000 से अधिक पद रिक्त हैं, जिससे लाखों प्रशिक्षित लाइब्रेरियन बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से जल्द से जल्द बहाली प्रक्रिया शुरू करने की अपील की है।
**सरकार की प्रतिक्रिया:**
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया है कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षण संस्थानों में लाइब्रेरियन की आवश्यकता को समझती है और जल्द ही इस दिशा में कदम उठाएगी। हालांकि, उन्होंने कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई, जिससे प्रदर्शनकारियों में असंतोष बना हुआ है।
**आगे की रणनीति:**
ऑल बिहार ट्रेंड लाइब्रेरियन एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार जल्द ही नियुक्ति प्रक्रिया शुरू नहीं करती है, तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे। उन्होंने कहा कि वे राज्यव्यापी आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे, जिससे सरकार पर दबाव बनाया जा सके। एसोसिएशन ने यह भी कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से मुलाकात करने की योजना बना रहे हैं।
**समाप्ति:**
आज की रैली ने एक बार फिर से राज्य में लाइब्रेरियन की नियुक्ति के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है। प्रशिक्षित लाइब्रेरियन की मांग है कि सरकार जल्द से जल्द रिक्त पदों को भरे और नए पदों का सृजन करे, ताकि राज्य की शिक्षा व्यवस्था में सुधार हो सके और उन्हें रोजगार मिल सके।










